पिता हैं सिक्योरिटी गार्ड, बेटी बनी IAS Ankita Kanti : हिंदी मीडियम से UPSC टॉपर

जहां चाह, वहां राह—इस कहावत को सच कर दिखाया है उत्तराखंड देहरादून की अंकिता कांति ने। एक सिक्योरिटी गार्ड की बेटी होते हुए भी उन्होंने UPSC जैसी देश की सबसे कठिन परीक्षा पास कर देशभर में 137वीं रैंक हासिल की। खास बात यह रही कि अंकिता ने यह सफलता हिंदी माध्यम से हासिल की, जिससे उन्होंने लाखों हिंदी भाषी छात्रों के लिए एक नई उम्मीद जगाई है।

IAS Ankita Kanti: चमोली के छोटे गांव से UPSC की बड़ी उड़ान

अंकिता कांति उत्तराखंड के चमोली जिले के गांव चिरखून की रहने वाली हैं। उनके पिता देवेश्वर कांति एक प्राइवेट कंपनी में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद IAS Ankita Kanti ने कभी हार नहीं मानी और अपनी कड़ी मेहनत से UPSC की परीक्षा में शानदार प्रदर्शन किया।

IAS Ankita Kanti Success Story Hindi

शुरुआती पढ़ाई और स्कूली उपलब्धियां

अंकिता ने 10वीं कक्षा की पढ़ाई देहरादून के दून मॉडर्न स्कूल से की, जहां उन्होंने 92.40% अंक प्राप्त कर उत्तराखंड बोर्ड में 22वां स्थान हासिल किया। इसके बाद 12वीं कक्षा में उन्होंने संजय पब्लिक स्कूल, कारबारी से 96.4% अंकों के साथ देहरादून टॉप किया और राज्य स्तर पर चौथे स्थान पर रहीं।

BSc से MSc तक का सफर और UPSC की तैयारी

अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई अंकिता ने डीबीएस कॉलेज, देहरादून से बीएससी (भौतिकी) में पूरी की और फिर डीएवी कॉलेज से एमएससी की डिग्री हासिल की। यहीं से उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू की और हिंदी मीडियम को अपनाते हुए देशभर में 137वीं रैंक हासिल की।

IAS Ankita Kanti

हिंदी माध्यम में UPSC सफलता: लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा

आज जब अधिकांश छात्र UPSC के लिए अंग्रेज़ी माध्यम को प्राथमिकता देते हैं, वहीं अंकिता की यह सफलता यह साबित करती है कि भाषा नहीं, बल्कि समर्पण और मेहनत सबसे बड़ी कुंजी है। उनकी यह उपलब्धि विशेष रूप से ग्रामीण और हिंदी भाषी छात्रों के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है।

हौसले हों बुलंद, तो कुछ भी नामुमकिन नहीं

IAS अंकिता कांति(IAS Ankita Kanti) की कहानी संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास की मिसाल है। उन्होंने साबित कर दिया कि आर्थिक सीमाएँ और भाषा की दीवारें अगर इरादे मजबूत हों तो कोई मायने नहीं रखतीं।

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